आरोपी शराब का अवैध परिवहन करते थे- आरोपी द्वारा अपराध उन्मोचित करने के लिये प्रस्तुत निगरानी को जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजेश गुप्ता सा. द्वारा किया गया निरस्त



दिनाक 01.07.2019 शाम को लगभग 3.25 बजे आबकारी विभाग पेटलावद में उनि. के पद पर पदस्थ कपिल कुमार सिंह मांगोदिया ने मुखबीर की सूचना पर भैंसोले-पेटलावद मार्ग पर ग्राम करड़ावद के निकट ट्रक क्रमांक जी.जे-03-व्ही-5936 को रोका। ट्रक के रूकते ही ड्राईवर कूदकर भाग गया, परंतु ट्रक में मौजूद दो अन्य व्यक्तियों पवन व मंगलंिसह को पकड़ लिया गया। ट्रक की तलासी लेने पर ट्रक में रद्दी ईटों एवं टुकड़ों की बिसात के नीचे 101 पेटी व्हीस्की (906.12 बल्क लीटर) छिपाकर रखी हुई बरामद की गई। आबकारी उनि. कपिल कुमार सिंह मांगोदिया ने मौके पर ही गवाहों के समक्ष शराब जप्त कर जप्ती पंचनामा बनाया। गवाहों के समक्ष मौके पर ही पकड़े गये पवन एवं मंगलसीह के मेमोरेण्डम लिये जाने पर उनके द्वारा यह बताया गया कि पकड़े गये ट्रक में 101 पेटी व्हीस्की उनके सेठ जितेन्द्र गेहलोत एवं जितेन्द्र बसेर ने लोड करवायी थी। उनके सेठ ने कहा था कि गुजरात बार्डर पर कमलेश भाई को सौंप देना। यह भी बताया गया कि वे लोग अपने सेठ के लिये डिलीवरी बाॅय का काम करते है एवं प्रत्येक डिलीवरी के लिये उन्हे 10-10 हजार रूपये मिलते हैं । अभियुक्तगण के विरूद्ध विवेचना उपरांत चालान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, झाबुआ के न्यायालय में पेश हुआ, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, झाबुआ के न्यायालय में आपराधिक प्रकरण कमांक 2707/2019 पर पंजीबद्ध कर विचारण प्रारंभ किया गयां।

अभियुक्त जितेन्द्र बसेर के विरूद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट झाबुआ द्वारा विरचित किये गये आरोप के विरूद्ध यह पुनरीक्षण सत्र न्यायालय झाबुआ के समक्ष इस आधार पर प्रस्तुत की गई थी कि अभियुक्त जितेन्द्र को अन्य आरोपी के मेमो के आधार  पर आरोपी बनाया गया, इस तर्क के समर्थन में  अभियुक्त की ओर से माननीय म.प्र. उच्च न्यायालय के न्याय दृष्टांत प्रस्तुत किये गये जिससे उपर जाते हुए माननीय जिला एवं सत्र न्यायधीश महोदय जिला झाबुआ श्रीमान राजेश गुप्ता सा. के द्वारा धारा 27 साक्ष्य अधिनियम एवं धारा 30 साक्ष्य अधि. के प्रावधानों का सुक्ष्मता से परीक्षण करते हुए यह माना कि सह अभियुक्त  द्वारा कि गई संस्वीकृति को एक ही अपराध मे संयुक्त रुप से विचारित अन्य आरोपी के विरुद्ध विचार में लिया जा सकता है इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये न्याय दृष्टांतों को मान्य करते हुए आरोपी द्वारा प्रस्तुत अपराध से उन्मोचित करने की निगरानी को निरस्त कर दिया।

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