भ्रष्ट नगर पालिका की चरम पर लापरवाही-घर का एकलौता चिराग बुझाने के बाद भी घटनास्थल और नगर में हुड़दंग मचाते आवारा मवेशी कर रहे फिर से खुले में मौत का खेल।

भ्रष्ट नगर पालिका की चरम पर लापरवाही-
घर का एकलौता चिराग बुझाने के बाद भी घटनास्थल और नगर में हुड़दंग मचाते आवारा मवेशी कर रहे फिर से खुले में मौत का खेल।
कांजी हाउस पर लोगों का -कब्जा  नगरपालिका मुख दर्शक।
नगर में आवारा मवेशियों का कब्जा और हुड़दंग इस कदर हावी था कि, नगर पालिका और प्रशासन इतना निर्लज्ज और कमजोर है कि, वो शहर से हुड़दंग मचाते मवेशियों को ठिकाने नहीं पहुंचा पाया, जबकि शहर के व्यापारी और जनता ने हजारों बार मवेशियों को हटाने और कांजी हाउस को दुरुस्त करने की मांग की। लेकिन भ्रष्ट पड़ी नगरपालिका के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
सैकड़ों एक्सीडेंट हुए हजारों लाखों का नुकसान भी हुआ। 
राजनीति दांते मे उलझी, अंधी नगर पालिका ने कभी भी शहर में हुड़दंग मचाने आवारा मवेशियों को पकड़कर उनको ठिकानों पर नहीं पहुंचाया।
अब नगरपालिका की बेशर्मी की हद पार होती दिखाई दे रही है। जब घर का एकलौता चिराग इस तरह बुझा कि  उसके परिजनों की आंखों से निरंतर अश्रु बहते जा रहे हैं, और अब भी सज्जन रोड पर वहीं आवारा उत्पति मवेशी हुड़दंग मचा रहे हैं। 
लापरवाही के बाद भी लज्जित नहीं होती नगर पालिका संवेदनाहीन भी हो चुकी है।
मवेशियों के हुड़दंग और उत्पाद से एक प्रभुत्व व्यक्ति, काल का ग्रास बन गया।
उसके परिवार के बहे आंसू का मोल तो कोई भी नहीं चुका सकता, मगर घटना की गंभीरता को परख कर सुरक्षा को सुचारू तो कर सकता है।लेकिन भ्रष्ट नगरपालिका गूंगी, बहरी, अंधी बन शहर के नेता के इशारों पर चलती, उठती, बैठती, नाचती है। और वह नगरवासियों की सुरक्षा के प्रति बेपरवाह और लापरवाही रहती है।
दरअसल मंगलवार- बुधवार की दरमियांनी रात को 4 से 5 आवारा मवेशी दोपहर बाद से ही पूरे सज्जन रोड पर उत्पात मचा रहे थे। इन उत्पाती आवारा मवेशियों के द्वारा अनेक मर्तबा लोगों को नुकसान पहुंचाया है। मगर उस रात तो काल का रूप धर इन उत्पाती मवेशियों ने छोटे से बच्चों के पिता को उनकी दुनिया से दूर कर दिया। उसके बाद भी देर रात तक आवारा पशु उत्पात मचाते रहे। 
संवेदनाहीन नगर पालिका की लापरवाही का आलम भी इस दर्दनाक शोकाकुल घटना के बाद भी उत्पात्ती आवारा मवेशी सज्जन रोड पर बीती रात हुड़दंग करते नजर आए।
हालांकि नगर पालिका और स्थानीय पार्षदों को जनता की सुरक्षा के लिए कैद में पड़े कांजी हाउस को छुड़वा कर दुरुस्त करना चाहिए, और शहर में भटकते आवारा उत्पाती मवेशियों को ठिकाने लगाना चाहिए, 
ताकि फिर किसी के घर का चिराग बुझे नहीं, 
ताकि फिर बच्चों के सिर पर से पिता का साया हटे नहीं,
 ताकि फिर किसी बहन से उसका भाई दूर हो नहीं, 
ताकि फिर कोई पिता जवान बेटे को कंधा दे नहीं ।
बहरहाल बुझा चिराग किसी के घर का तो नगर पालिका प्रशासन को क्या चिंता... लेकिन जनता के आक्रोश से कब कौन बचा है, काल का रूप लेकर मवेशियों ने एक व्यक्ति की जीवन लीला समाप्त तो कर दी... कहीं... जनता में आक्रोश नगर परिषद के पार्षद नेताओं का राजनीतिक जीवन आने वाले समय में समाप्त ना कर दे... बाकी नगर पालिका और परिषद में बैठे संवेदनाहीन लोगों को समय ही बताएगा कि उनके अंदर सवेदना जागृत कैसे होगी।
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