अभियोजन अधिकारियों ने लिया पाक्सों एक्ट के संचालन का प्रषिक्षण।


लोक अभियोजक बने पीडि़त बच्चों की आवाज-श्री पुरूषोत्तम शर्मा मध्य प्रदेष के 550 लोक अभियोजन अधिकारियों ने लिया पाक्सों एक्ट के संचालन का प्रषिक्षण।
 लोक अभियोजन संचालनालय मध्य प्रदेश 05.08.2020 को ऑनलाईन वेबिनार के माध्यम से पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत ‘‘विषेष अभियोजक की भूमिका रिमांड से अंतिम निर्णय तक’’ विषय पर प्रषिक्षण पुरूषोत्तम शर्मा, महानिदेषक/संचालक लोक अभियोजन म.प्र. की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
 हेमन्त जोषी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीष) बड़वानी म.प्र. ने मुख्य वक्ता एवं विषय विषेषज्ञ के रूप् में व्याख्यान दिया।
श्री पुरूषोत्तम शर्मा ने पॉक्सों एक्ट के आवष्यकता एवं इसकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब एक अबोध बालक या बालिका के साथ लैंगिक शोषण का अमानवीय पाषविक कृत्य की घटना अपने आप में इतनी भयावह है की एक सभ्य समाज की कल्पना को सिरे से नकार देती है। दुख तब और भी होता है जब ऐसी घटना घट जाने के बाद पीडि़त व्यक्ति व उसके परिवार जन न्याय प्राप्ति हेतु ना सिर्फ संघर्ष करते हैं वरन् कई बार लगता है कि वह बिना न्याय प्राप्त किए हार मान लेते हैं और यहां मुझे लगता है कि उस कृत्य किया है उतनी ही जिम्मेदार यह समाज भी है जो उसे न्याय ना दिला पाया।
गर्व महसूस हो रहा है कि वर्ष 2018 में हमने सम्पूर्ण भारत वर्ष में सबसे अधिक फांसी की सजा पॉस्को के अपराधियों को दिलवा कर ‘‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉड्स लंदन’’ में मध्य प्रदेेश लोक अभियोजन का नाम दर्ज करवाया था और हम निरंतर  अपने इस प्रयास को आगे बढ़ाने हेतु तन मन धन से लगे हुए हैं, यह वेबिनार भी इसी की एक कड़ी है। संचालक महोदय ने सभी अभियोजन अधिकारियों से आहन है कि प्रॉसिक्यूटर को पीडि़त बच्चों की आवाज बनना है और समाज में एक ऐसी सीख प्रस्तुत करना है कि भविष्य में छोटे-छोटे बच्चों के विरूद्व ऐसे घृणित कृत्य को करने के पहले किसी भी व्यक्ति का दिल दहल जाए।
 हेमंत जोषी द्वारा अपने व्याख्यान में पॉक्सों एक्ट की चर्चा की गयी। उन्होंने लोक अभियोजन अधिकारियों द्वारा पॉक्सां प्रकरणों का किस तरह से संचालन किये जाने के विषय में बताया। उनके द्वारा अधिनियम के विषेष प्रावधानों को विस्तार से समझाया गया। उन्होंने न्यायालय की अभियोजन से क्या अपेक्षा रहती है इस पर भी विस्तार से चर्चा की। उम्र निर्धारण, अनुसंधान समय सीमा, ब्क्, डीएनए आदि विषय पर न्याय दृष्टांतों के साथ उनकी वयाख्या भी की। उन्होंने लोक अभियोजन अधिकारी की भूमिका के सम्बन्ध में विस्तार से बताया जिससे ऐसे अपराध करने वालों को अधिक से अधिक दण्ड से दण्डित किया जा सके।
प्रषिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा सुश्री सीमा शर्मा, एडीपीओ/राज्य समन्वयक पॉक्सों, रतलाम द्वारा तैयार गई तथा कार्यक्रम का संचालन भी किया गया। प्रषिक्षण में लोक अभियाजन म.प्र. के समस्त उप-संचालक, जिला लोक अभियोजन अधिकारी, पॉक्सो एक्ट के विषेष लोक अभियोजक, प्रभारी विषेष लोक अभियोजक तथा सहायक जिला अभियोजन अधिकारी एवं जिला समन्वयकों ने सम्मिलित होकर प्रषिक्षण प्राप्त किया।
उक्त जानकारी सहा. जिला मीडिया सेल प्रभारी सुश्री सूरज वैरागी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी, झाबुआ द्वारा दी गई। 
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