दाने दाने को मोहताज हो गए महाविद्यालयों के फाॅलेन आउट अतिथि विद्वान ,


' उच्च शिक्षा मंत्री ने विभागीय समीक्षा में नहीं दिया लिस्ट निकालने का निर्देश ' :-
 पिछले दिसंबर माह से 2000 फॉलेन आउट अतिथि विद्वानों के आर्थिक हालात दयनीय होने से इनके स्वंय के साथ पारिवार वालो को भी दाने दाने के लिए मोहताज होना पढ़ रहा है। कमलनाथ सरकार ने सहायक प्राध्यापक भर्ती 2017 की जांच का वचन दिया था, लेंकिन कोई भी जांच नहीं की गई और न ही कोर्ट में लंबित आदेशो का पालन किया गया। बल्कि दिसंबर 2019 से सतत चयनितो को अधिकारी नियुक्ति आदेश देते आ रहे है। कमलनाथ सरकार ने ही 1156 पदो की च्वाईस फिलिंग 6 मार्च को करवाई थी, 9 मार्च को लिस्ट निकलना थी। लेंकिन सरकार की स्तिथि डावांडोल होने से उक्त सूची आज तक नहीं निकाली गई है। इसमें से 450 पद कमलनाथ केबिनेट से मंजूर हुए थे, जिनको अब तक वित्त विभाग ने मंजूरी देकर उच्च शिक्षा विभाग को नहीं भेजे है। वहीं सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. मोहन यादव ने विभागीय समीक्षा की, जिसमें अतिथि विद्वानों के बारे में चर्चा जरूर हुई। लेंकिन फाॅलेन आउट की सूची कब तक निकलेंगी इसका जिक्र नहीं किया गया। पहली केबिनेट के विस्तार के बाद जब गृहमंत्री डाॅ. नरोत्तम मिश्रा से अतिथि विद्वान मिले थे, तब उन्होने कहा था कि, अभी विभाग का बंटवारा तो हो जाने दो, जैसे ही विभाग का मुखिया बनेगा, आपकी हर समस्या का समाधान हो जाएगा। परंतु अब सबकुछ मिलने पर भी इनका भविष्य अधूरा है।
अतिथि विद्वान नियमितीकरण मोर्चा के मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया ने बताया कि, अब 8 माह की बेरोजगारी के बाद हमारी हालत गम्भीर होती जा रही है। शिवराज सरकार ने अपने दिए भरोसे और आश्वासन को ध्यान में रखकर तुरंत चयन सूची निकालना चाहिए तथा विपक्ष में रहते विधानसभा में जिस प्रकार से मुद्दा उठाया था, उसी प्रकार से अब हमारे नियमितीकरण के मुद्दे को केबिनेट में पास करना चाहिए।
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